Telecom कंपनी पर लगा 5.42 लाख रुपये का जुर्माना, फिर भी बाजार खुलते ही चढ़ा शेयर, भाव 50 रुपये से कम

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Telecom: शेयर बाजार के नियमों का पालन न करने की वजह से महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड यानी MTNL को बड़ा झटका लगा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने कंपनी के बोर्ड में निर्देशकों की नियुक्ति से जुड़े नियम तोड़े जाने पर कुल 5.42 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है। फिर भी कंपनी के शेयरों में आज गिरावट के बजाय हल्की बढ़त नजर आ रही है, जो निवेशकों के बीच कुछ उम्मीद जगाती दिख रही है।

आज के शेयर कारोबार की स्थिति

सोमवार को MTNL का शेयर 38.32 रुपये पर खुला और जल्द ही 38.60 रुपये तक चढ़ गया। शुरुआती घंटों में यह 38.19 रुपये के निचले स्तर को भी छू गया, लेकिन सुबह दस बजे के आसपास 38.39 रुपये पर स्थिर हो गया। इस उतार-चढ़ाव के बावजूद शेयर मामूली लाभ के साथ ट्रेड कर रहा था, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है। कंपनी का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 61.87 रुपये और निम्नतम 37.42 रुपये रहा है, जिससे साफ पता चलता है कि शेयर अभी लंबे समय के निचले पायदान पर घूम रहा है। निवेशक इस तरह के उतार-चढ़ाव को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

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कंपनी के वित्तीय नुकसान और प्रदर्शन

इस साल MTNL के शेयर ने निवेशकों को 23.89 प्रतिशत का नुकसान दिया है, जबकि पिछले पांच दिनों में 1.82 प्रतिशत की और गिरावट आई है। सबसे ताजा तिमाही में कंपनी को 943.15 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ, जो उसके कर्ज के बोझ और संचालन की कमजोरियों को दिखाता है। विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII की होल्डिंग 30 सितंबर 2025 तक घटकर महज 0.04 प्रतिशत रह गई, जो पिछली तिमाही से कम है। यह ट्रेंड बताता है कि बड़े निवेशक कंपनी से दूरी बना रहे हैं, क्योंकि लगातार घाटे और नियामकीय मुश्किलें विश्वास कम कर रही हैं।

जुर्माने की वजह और नियुक्ति नियम

MTNL ने शनिवार को शेयर बाजारों को सूचना दी कि उसे चार स्वतंत्र निर्देशकों की नियुक्ति करनी थी, लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रही। एनएसई और बीएसई ने सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स यानी एलओडीआर विनियम 2015 की धारा 17(1) के उल्लंघन पर यह कार्रवाई की। जुर्माने में 4.6 लाख रुपये मूल राशि और 82,800 रुपये का 18 प्रतिशत जीएसटी शामिल है। कंपनी ने सफाई दी कि वह पब्लिक सेक्टर की इकाई है, इसलिए बोर्ड में सभी नियुक्तियां दूरसंचार विभाग यानी डीओटी के जरिए होती हैं। इस सरकारी हस्तक्षेप के कारण निजी कंपनियों की तरह तेज फैसले लेना मुश्किल हो जाता है, जो कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नियमों से टकरा रहा है।

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Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है और इसमें दी गई कोई भी जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें। बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और पिछले प्रदर्शन भविष्य के परिणामों की गारंटी नहीं देते।

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